Sunday, May 10, 2009

स्वर्णाक्षर


१- वातावरण के जहर से जादा जहरीला होता है मन का जहर ।


२- हमारा दिमाग खेत की तरह है , वैचारिक खाद डालने पर ही बुद्धि की फसल लहलहाती है ।


३- जीतना एक आदत है , दुर्भाग्य से हारना भी एक आदत है ।


४- भविष्य में जीने वालों के साथ यादों के बसंत नही होते ।


५- पुराणी यादों को मुस्कराहटों के साथ यद् रखें , आंसुओं से नही ।


६- मूर्खों का साथ और अपने पैर पर कुल्हाडी मरना एक सामान ही है ।


७- जो लोग बहाने बना लेते हैं, वे लोग कुछ और नही बना पाते।


८- अंधे के हाथ बटेर भी तभी लगती है , जब वह कोशिश करता है ।


९- समय तेजी से उड़ता है पर आप उसे पकड़ सकते हैं ।


१०- हमारा दिमाग और पैराशूट खुलने पर ही काम करते हैं ।

रेनू ....

2 comments:

संजय भास्‍कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

vandana gupta said...

gazab ki prerak baatein.